दरअसल बिजय कुमार ओडिशा के बेरहामपुर के रहने वाले हैं, जबकि उनकी दुल्हन श्रुति उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। दोनों एक निजी फर्म में काम करते हैं। उन्होंने अपनी शादी में पंडित नहीं बुलाया था। कार्यक्रम में जब सभी मेहमान पहुंच गए, तो उन्होंने एक दूसरे के गले में माला बांधी। इसके बाद उन्होंने संविधान की शपथ लेकर जिंदगीभर साथ रहने का वादा किया।
वहीं कपल ने मेहमानों को महंगे उपहार लाने के लिए मना कर दिया था। उसके बदले उन्होंने सभी से रक्तदान का आग्रह किया। इसके लिए कार्यक्रम स्थल के पास खासतौर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें कई लोग शामिल हुए। साथ ही दोनों ने सभी को अंग दान के बारे में बताते हुए उनसे इस दिशा में आगे आने का अनुरोध किया।
मामले में बिजय के पिता डी मोहन राव ने कहा कि उनके बड़े बेटे की शादी 2019 में इसी तरह के समारोह में हुई थी। हालांकि उस दौरान दुल्हन के परिवार को काफी समझाना पड़ा था। अब उन्होंने श्रुति के माता-पिता को पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज का पालन करने के बजाए संविधान के नाम पर शादी करने के लिए मना लिया। राव के मुताबिक संविधान एक पवित्र ग्रंथ है। इसमें शामिल आदर्शों के प्रति लोगों को जागरूक होना जरूरी है। वहीं इलाके में सक्रिय एक संस्था ने बताया कि पिछले तीन साल में वहां ऐसी चार शादियां हो चुकी हैं।