कोविड 19 की दूसरी वर्षगांठ पर जिस तरह से कोरोना के नए वैरियंट ने अपना रुप दिखाना शुरु कर दिया है वह चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। ओमिक्रान से जिस प्रकार शुरुआत में जन हानि नहीं हो रही थी उससे यह आश बंधी थी कि चलो ले देकर यह अपना मामूली असर दिखा कर चला जाएगा पर जिस तरह से इसने असर दिखाना शुरु कर दिया है उससे विशेषज्ञ हिल गए हैं। लगभग एक माह में ही अफ्रीका से चला ओमिक्रान दुनिया के 91 देषों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। और केवल उपस्थिति दर्ज कराना ही नहीं अपितु तैजी से फैलता जा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो यदि सख्ती नहीं होती है तो किसमस तक इंग्लैण्ड में प्रतिदिन चार लाख संक्रमित आने लगेंगे। ओमिक्रान के कारण इंग्लैण्ड में मरने वालों की संख्या भी चार हजार के आसपास कयास लगाया जाने लगा है। इंग्लैण्ड तो एक उदाहरण मात्र है। दुनिया के लगभग सभी देशों में ओमिक्रान के दिन दूने संक्रमित आने लगे है। न्यूयार्क में पहले ही कर्फ्यू लगाया जा चुका है। दुनिया के देशों में अधिकांश जगह हवाई यात्रा खासतौर से अफ्रीका से आने वाली फ्लाईट पर रोक लग चुकी है। योरोप के अनेक देशों में हालत बिगड़ते जा रहे हैं तो कोरोना की दूसरी लहर जैसे हालातों का डर सताने लगा है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश लॉकडाउन जैसे अप्रिय पर जरुरी प्रतिबंध की और कदम बढ़ा रहे हैं। भारत में भी कोरोना के मामलों मंे तेजी आई है। ओमिक्रान अब हमारे देश में भी इकाई दहाई की संख्या को पार कर चुका है और सैकड़ों की संख्या पर पहुंच रहा है।
दरअसल कोरोना को लेकर जितने कयास लगाए जा रहे थे वे सब निर्मूल सिद्ध हुए है। जब 2019 में कोरोना संक्रमण शुरु हुआ तो यह माना जाने लगा कि गर्मियां आते ही यह अपने आप दफन हो जाएगा पर ऐसा हुआ नहीं बल्कि 2020 में तो भयावह दूसरी लहर का हमारे देश सहित दुनिया के देषों ने कहर भुगता है। चिकित्सा विज्ञानी पहले ही तीसरी लहर की आसंका व्यक्त कर चुके हैं। एक और सरकारें व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास करती है तो थोड़ी सी ढील ही परेशानी का कारण बन जाती है। योरोपीय देशों में कोरोना प्रोटोकाल प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं तो अमेरिका जैसे सभ्य देश में सैनिकों के एक वर्ग द्वारा वैक्सीन लगवाने से ही इंकार किया जा रहा है। हांलाकि अब अमेरिकी सरकार ऐसे सैनिकों के खिलाफ कार्यवाही करने का मन बना चुकी है। यही हाल लोगों की कोरोना प्रोटोकोल की पालना नहीं करने का हो रहा है। अब बीच राह या बाजार में सही तरीके से मास्क लगाए गिने चुने लोग ही दिखाई देने लगे है। दो गज दूरी की पालना की बात तो बेमानी होगी। ऐसे में कोरोना का कोई भी वैरियंट हो उससे बचा पाना मुश्किल भरा काम ही है। मजे की बात यह है कि ओमिक्रान कोरोना की वैक्सीनेशन की दोनों डोज लेने वालों को भी नहीं बख्स रहा है। ऐसे में बुस्टर डोज की बात की जाने लगी है।
देखा जाए तो कोरोना के नए वैरियंट ओमिक्रान को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बैरिंयट ऑफ कंसर्ट घोषित करने से ही इसकी गंभीरता को समझा जा सकता है। विशेषज्ञों द्वारा माना जा रहा है कि कोरोना के डेल्टा अवतार से भी यह सात गुणा तेजी से फैलने वाला वैरियंट है। यह भी साफ हो जाना चाहिए कि वैरियंट की गंभीरता को देखते हुए उसे कंसर्ट ऑफ वैरियंट घोषित किया गया है अन्यथा स्थिति में तो सामान्यतः वैरियंट ऑफ इंटरेस्ट की श्रेणी में ही रखा जाता है। एक अनुमान के अनुसार डेल्टा से सात गुणा अधिक तेजी से यह फैलता है। दरअसल यह माना जा रहा था कि कोरोना का अभिशिप अधिक दिन नहीं चलेगा पर देखते देखते दो सालों में ही दुनिया के देष इसके पांच वैरियंट से रुबरु हो चुके हैं। सितंबर 2020 में इंग्लैण्ड में अल्फा, मई, 2020 में दक्षिण अफ्रीका में बीटा, नवंबर, 2020 में ब्राजील में गामा, अक्टूबर, 2020 में भारत में डेल्टा और अब ओमिक्रान ने असर दिखाना शुरु कर दिया है। दरअसल वायरस की जीनोमिक संरचना में बदलाव होकर के यह नए वैरियंट का रुप ले लेता है।
दरअसल यह मौसम कोरोना खासतौर से नए वैरीयंट ओमिक्रान के लिए अधिक अनुकूल हो गया है। देखा जाए तो सर्दी में वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं। यह तो कोरोना काल है नहीं तो वैसे भी सर्दियों में सर्दी जुखाम का असर सबसे ज्यादा देखा जाता है यह आज की नहीं हमेशा के हालात रहे हैं। अब सर्दी जुखाम वालों को कोरोना या यों कहें कि ओमिक्रान जल्दी संक्रमित कर देता है यही कारण है कि योरोप मंे ओमिक्रान का तेजी से फैलाव हुआ हैं। अब क्रिसमिस और नया साल का जश्न सामने हैं तो हमारे यहां अभी शादियों का सीजन निकला ही है। हांलाकि यात्रा करने वालोें से यह वायरस फैल रहा है पर जहां एक बार आ जाता है तो फिर संपर्क आने वाले व्यक्ति को संक्रमित करने में देरी भी नहीं लगाता। जश्न के चक्कर में भीड़भाड होगी, बाजारों में रौनक बढ़ेगी तो लोग खरीदारी या घूमने घामने निकलेंगे, डर तो लोगों का निकल ही चुका है ऐसे मेें क्या दुकानदार और क्या आम नागरिक, कोरोना प्रोटोकाल की पालना करना तो भूलता ही जा रहा है। डर के कारण मास्क लटका अवश्य लेता है पर उसका प्रोपर उपयोग नहीं हो रहा जिससे संक्रमण का अधिक डर सताने लगा है। इसके अलावा सार्वजनिक वाहनों और साधनों में प्रोटोकाल की पालना नहीं ही हो रही। ऐसे में अब चुनौती अधिक गंभीर हो गई है।
इन सब हालातों को देखते हुए यह समझना होगा कि एकाध साल तो कोरोना के संग ही जीना हैं । ऐसे में कोरोना कोई नया अवतार लेकर आए उससे पहले ही सतर्कता ही हमारे जीवन का बचा सकती है। दो गज की दूरी और मास्क जरुरी जीवन में रच बस जाना चाहिए। सेनेटाइजर और बारबार हाथ धोने की बात तो अब दूर की बात हो गई। कोरोना के पीक टाइम में जब बाहर से आते ही गरम पानी से नहाने और गरम पानी से कपड़े धोने में जुट जाते थे वह तो अब लोग भूल चुके हैं। बहरहाल सावधानी और सतर्कता आज की आवश्यकता है और यह हमें ध्यान रखना ही होगा।