बीजेपी गठबंधन के लिए मुफीद नहीं कटेहरी सीट
अम्बेडकरनगर। जिले की कटेहरी विधानसभा में गठबंधन का चुनाव बीजेपी को शूट नहीं करता है। ये सीट जब-जब गठबंधन में गई है, उम्मीदवार अपनी जमानत बचा नहीं पाया। 2002 और 2007 में बीजेपी ने कटेहरी सीट को गठबंधन में जदयू को दे दी। नतीजा ये रहा कि दोनों बार बीजेपी-जदयू गठबंधन के प्रत्याशी केके त्रिपाठी को मुंह की खानी पड़ी और वह चुनाव हार गए। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर ये सीट फिर गठबंधन में गई तो बीजेपी का मूल वोटर अपना वोट सपा-बसपा में शिफ्ट करेगा।
बीजेपी की सेफ सीट मानी जाती है कटेहरी
कटेहरी सीट बीजेपी की सेफ सीट मानी जाती है, लेकिन काफी दिनों से सत्ता से दूरी और दो बार सीट गठबंधन में जाने से यहां का बीजेपी वोट कभी समाजवादी के साथ तो कभी बीएसपी को अपना वोट शिफ्ट कर देता था। यही वजह थी कि 1991 में इस सीट पर बीजेपी ने कमल खिलाया, लेकिन उसके बाद से यह सीट बीजेपी के हाथ से निकल गई और इस पर कभी बसपा और कभी सपा का कब्जा बना रहा।
2017 में बीजेपी के साथ लौटा वोटर
2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस सीट पर जबरदस्त वापसी की। कुशल संगठन और मेहनत से इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को करीब 78,000 वोट मिले। हालांकि बीजेपी उम्मीदवार अवधेश द्विवेदी यहां कमल नहीं खिला सके और करीब 6,300 मतों से चुनाव हार गए, लेकिन इस सीट पर बीजेपी ने जीत के नजदीक पंहुचकर ये साबित कर दिया कि बीजेपी के लिए ये सीट आगे सेफ और मुफीद रहेगी और आसानी जीती जा सकती है।