दो रेडियोलॉजिस्टा का सृजित है पद लेकिन एक के भरोसे चल रहा पूरा अस्पताल
अम्बेडकरनगर। जिले में अगर आपको तत्काल अल्ट्रासाउंड की जरूरत हो तो आपके लिए जिला अस्पताल मुफीद नहीं रहेगा। कारण, यहां 15 से 20 दिन के इंतजार के बाद ही अल्ट्रासाउंड किया जाता है। नतीजन गंभीर मरीज मजबूरी में प्राइवेट पैथालॉजी में 500 से 600 में अपना अल्ट्रासाउंड करा रहे हैं।
यही नहीं महात्मा ज्योतिबा फुले जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों की लाइन लगती है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को 15 से 20 दिन बाद का नंबर दिया जाता है। यही वजह है कि जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने की उम्मीद लेकर दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बैरंग वापस लौटना पड़ता है।
जिला अस्पताल के कैंपस में बने एमसीएच विंग में गर्भवती महिलाओं के खून की जांच और अल्ट्रासाउंड कराने की व्यवस्था है, लेकिन यहां बने एमसीएच विंग मे रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को मजबूर होकर जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए लाइन लगाना पड़ता है। वहीं जिला अस्पताल में भी रेडियोलॉजिस्ट के 2 पद सृजित हैं, लेकिन यहां केवल डॉ. पीएन यादव की तैनाती है। एक डॉक्टर के चलते मरीजों की भीड़ बढ़ जाती है।
जिला अस्पताल में रोजाना 150 -200 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आते हैं, लेकिन 60-70 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है, बाकी मरीजों को 15-20 दिन का नंबर मिल जाता है, जिससे तत्काल अल्ट्रासाउंड कराने की आस लेकर आए मरीजों को वापस लौटना पड़ता है।
ये मरीज प्राइवेट में जाकर 500-600 रुपए देकर अल्ट्रासाउंड कराते हैं। रामपुर से अल्ट्रासाउंड कराने आईं किरण ने बताया, वह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अस्पताल आईं, लेकिन नंबर न आने कारण अभी तक नहीं हो पाया। जिससे अब मजबूर होकर प्राइवेट लैब में कराना पड़ेगा।