टाण्डा का चर्चित डोकोमो हत्याकांड बना कोतवाल के गले की हड्डी

टाण्डा का चर्चित डोकोमो हत्याकांड बना कोतवाल के गले की हड्डी


अम्बेडकरनगर।
एसटीएफ और एसओजी ये पुलिसिया तंत्र के वो दस्ते है जो अपराध के शुरू होने से पहले उसपर नियंत्रण पाने में अपनी हिस्सेदारी निभाते हैं। जनपद में कई पुलिस अधिकारी एसटीएफ दस्ते का संचालन व दस्ते में कार्य कर चुके है जिसमें टाण्डा के वर्तमान कोतवाल भी शामिल है लेकिन टाण्डा का चर्चित डोकोमो हत्या कांड कोतवाल के गले की हड्डी बन गया और उनका अनावरण आज तक नही हो सका।

एसटीएफ की कार्यशैली प्रदेश में सबसे तेज मानी जाती इसी लिए एसटीएफ को वहीं प्रकरण सौपा जाता जो बेहद पेचीदा होता है लेकिन छोटा सा मामला टाण्डा कोतवाल की सभी बुध्दि और इटेलेजेंसी को आइना दिखा गई और अंतः मामले में जिले की एसओजी टीम को लगना पड़ा। बता दे कि डोकोमो नाम के इस बच्चे की हत्या की आशंका में परिजनों में टाण्डा कोतवाली पर मुकदमा पंजीकृत करवाया था लेकिन टाण्डा पुलिस को आरोपी ढूंढे नही मिल रहे हैं। 

गौरतलब है कि बीते 23 नवंबर की शाम पांच बजे सुभाष उर्फ डोकोमो पुत्र लक्ष्मी प्रसाद निवासी सकरावल पूरब टाण्डा रहस्यमय ढंग से लापता था जिसका शव उसके घर से मात्र चंद कदम की दूरी पर स्थित घनी झाड़ियों में क्षत विक्षत हालत में बीते तीन दिसम्बर की सुबह मिला था। एक माह पूरा होने को नही लेकिन टाण्डा पुलिस के हाथों एक भी सुराग नहीं लगा जिससे आरोपियों तक पहुंचा जा सके। 

सूत्रों की माने तो अब इस मामले की पड़ताल व आरोपियों को ढूंढने का कार्य जिले की एसओजी टीम ने शुरू कर दिया है। एसओजी टीम इन दिनों टांडा में संदिग्धों से पूछताछ करने में लगी हुई है। आरोपियों को पकड़ने का जिम्मा एसओजी को मिलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। यह कार्य हर मामलों की तरह इस मामले में भी एसओजी को मौखिक रूप से सौंपी गई है।

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