अम्बेडकरनगर। समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस पर है। जान जोखिम में डाल कर दूसरों को सुरक्षा देने वाले इन पुलिस कर्मियों की जान खतरे में है। कड़ी ड्यूटी पूरी करने के बाद चैन की नींद लेने के लिए एक अदद भवन तक नसीब नहीं है। पुराना, जर्जर हो चुकी भवन में रहने के लिए मजबूर है।
भवन के छत से प्लास्टर टूट कर गिरते है। दीवार व छत पूरी तरह से जर्जर हो गयी हैआगे का छज्जा भी किनारे का हिस्सा गिर चुका है। भवनों की हालत ऐसी है बरसात के समय छत से पानी टपकता है, कभी भी भरभराकर भवन गिर जाए उसके बावजूद भी जान हथेली पर रख कर पुलिस कर्मी ऐसे चौकी में रहने के लिए मजबूर हैं।
अब तक कई सरकारें आई और गई लेकिन इनके आवास के बारे में किसी ने भी नहीं सोंचा यदि सोचा होता तो ऐसी स्थिति नहीं होती।कड़ी ड्यूटी पूरी करने के बाद भी इन पुलिस कर्मियों के लिए चैन की नींद लेने के लिए एक अदद सुरक्षित छत तक नसीब नहीं है।
जिले में कई विभागों का कार्यालय जर्जर भवनों में संचालित हो रहा है। चौकी शहजादपुर का भवन भी जर्जर हो चुके हैं। इन कार्यालयों में काम करने वाले और भवनों में रहने वाले कर्मचारियों को हमेशा भय बना रहता है। जर्जर भवनों की मरम्मत के प्रयास भी काम नहीं आ रहे हैं।