अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी पर नजर आई 'रहस्यमयी' काली पट्टी

अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी पर नजर आई 'रहस्यमयी' काली पट्टी


पृथ्वी पर कई
ऐसे स्थान हैं जहां की खूबसूरत सिर्फ आसमान से देखी जा सकती है। धरती की ऐसी एक खूबसूरत तस्वीर खगोलयात्री (एस्ट्रोनॉट) मथायस मौरर ने शेयर की है, जिसे सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है। मथायस मौरर वर्तमान में अंतरिक्ष में तैर रहे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में रहकर पृथ्वी पर नजर बनाए हुए हैं। मौरर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं, उनके द्वारा पोस्ट की गई एक फोटो इन दिनों इंटरनेट पर खूब चर्चा में हैं।

अंतरिक्ष यात्री मथायस मौरर अपने इंस्टाग्राम पर जो भी पोस्ट करते हैं, वह कुछ ही समय में वायरल हो जाती है। इसका एक उदाहरण हाल ही में सामने आए हैं, जब उनकी एक तस्वीर काफी पसंद की जा रही है। फोटो में हमारी पृथ्वी की अद्भुत सुंदरता को देखा जा सकता है। दरअसल, मौरर ने पृथ्वी के किसी सुदूर इलाके की तस्वीरें शेयर की हैं, जिसको देखने पर किसी आर्टवर्क की तरह महसूस होता है। यूजर्स भी फोटो की तारीफ कर रहे हैं।

फोटो शेयर करते हुए मथायस मौरर ने कैप्शन में लिखा, 'ऊपर से देखने पर, हमारी पृथ्वी कला के एक सच्चे काम की तरह दिखती है। मैंने अरब प्रायद्वीप की ये रंगीन तस्वीरें लीं, लेकिन मुझे यह भी आश्चर्य है कि रेगिस्तान में ये आकृतियां और रेखाएं क्या हैं?' तस्वीरों में देखा जा सकता है कि जमीन पर एक लंबी चौड़ी काली पट्टी दिखाई दे रही है, जिसे देख अंतरिक्ष यात्री भी हैरान हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी ने कैनवास पर ब्रश से ये पट्टी बना दी हो।

पोस्ट को करीब एक दिन पहले शेयर किया गया था और अब तक इसे करीब 2,300 लाइक्स मिल चुके हैं। पोस्ट किए जाने के बाद से फोटो पर ढेर सारे लोग कमेंट कर रहे हैं। एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, 'इतनी अद्भुत तस्वीर, इसे शेयर करने के लिए आपका धन्यवाद।' इसी तरह कई और इंटरनेट यूजर ने फोटो पर हैरानी जताई है। हालांकि पृथ्वी पर नजर आ रही काली पट्टी को लेकर अभी तक कोई खुलासा नहीं सामने आया है।

मथायस मौरर एक मशहूर वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री है। वर्तमान में वह खूबसूरत तस्वीर खगोलयात्री (एस्ट्रोनॉट) स्पेस यान में रहकर आसमान से पृथ्वी का अध्ययन कर रहे हैं। मथायस मौरर का जन्म 18 मार्च, 1970 में, जर्मनी में हुआ था। मौरर ने 1989 में जर्मनी में वेंडालिनम हाई स्कूल से स्नातक किया। उन्होंने तब माल्सेटर इमरजेंसी सर्विस के साथ अर्धसैनिक के रूप में अपनी अनिवार्य नागरिक सेवा शुरू की।

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