- गुरुवार को मायावती ने बड़ा बदलाव करते हुए पार्टी में मंडल व्यवस्था खत्म की
- इसकी जगह राज्य को छह भागों में बांटकर तीन-तीन मंडलों के जोन बनाए हैं
- गुरुवार को हुई इस बैठक में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा नहीं थे
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पार्टी में बड़ा बदलाव करते हुए मंडल व्यवस्था खत्म कर दी है। इसकी जगह उन्होंने जोनल व्यवस्था लागू की है। इसके लिए राज्य को छह भागों में बांटकर तीन-तीन मंडलों के जोन बनाए हैं। हर जोन के दो मुख्य जोन इंचार्ज होंगे। साथ ही प्रदेश प्रभारी का पद भी समाप्त कर दिया गया है। गुरुवार को हुई इस बैठक में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा नहीं दिखाई दिए। इससे उन पुरानी अटकलों को बल मिला है कि उन्हें पार्टी अब हाशिए पर खिसका चुकी है।
मायावती गुरुवार को आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव के परिणामों के बाद मंडल के वरिष्ठ नेताओं से बात कर रही थीं। इन चुनावों में बसपा ने रामपुर से कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा किया था लेकिन आजमगढ़ से गुड्डू जमाली को मैदान में उतारा था। परिणाम आए तो जमाली तीसरे स्थान पर थे, बीजेपी के दिनेश लाल यादव निरहुआ विजयी रहे, सपा के धर्मेंद्र यादव दूसरे नंबर पर रहे।
इस अहम बैठक में सतीश चंद्र मिश्रा शामिल नहीं हुए। लोकसभा उपचुनाव के लिए जिन 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की गई थी उनमें भी उनका नाम नहीं था। उस समय भी यह बात उठी थी कि यूपी विधानसभा चुनाव के समय पूरे परिवार के साथ बसपा का प्रचार करने उतरे सतीश चंद्र मिश्रा को इस लिस्ट में शामिल क्यों नहीं किया गया।
चर्चा है कि यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी ने अपनी मूल विचारधारा की ओर लौट रही है। इसी बीच सतीश चंद्र मिश्र के सबसे करीबी पूर्व मंत्री नकुल दुबे को पार्टी से बाहर कर दिया गया। उसके बाद नकुल कांग्रेस में चले गए हैं। कहा जा रहा है कि बिना सतीश चंद्र मिश्रा से सलाह लिए वह कांग्रेस में नहीं गए होंगे। उस समय यह भी अटकलें थीं कि मिश्रा खुद कांग्रेस में जा सकते हैं। बहरहाल, सतीश चंद्र मिश्रा क्या करेंगे यह तो भविष्य ही बताएगा लेकिन गुरुवार की बैठक के बाद यह बात पुख्ता हो गई है सतीश चंद्र मिश्रा पार्टी के अहम फैसलों से दूर रखे जा रहे हैं।
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