इमरजेंसी मेडिकल अफसर की कमी से नहीं चल सका ट्रामा सेंटर

इमरजेंसी मेडिकल अफसर की कमी से नहीं चल सका ट्रामा सेंटर



अम्बेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज में ट्रामा संचालित करने की योजना फाइलों में सिमटी है। इसके अभाव में मेडिकोलीगल के मरीजों का यहां इलाज नहीं होता है। कॉलेज प्रशासन इसके लिए कई बार शासन से मांग कर चुका है। ईएमओ नहीं मिलने से ट्रामा सेंटर संचालन में बाधा है।

 राजकीय मेडिकल कालेज का संचालन शुरू हुए एक दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी ट्रामा सेंटर का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इससे सड़क दुर्घटना में घायल, मारपीट में घायल, सर्पदंश व जहर खाने वाले मरीजों का यहां इलाज नहीं होता है। इसी आवश्यकता को लेकर मरीजों को लखनऊ और वाराणसी का चक्कर लगाना पड़ता है। 

गंभीर रूप से घायल मरीजों को इलाज के लिए दूर ले जाने में जहां मरीजों के सामने संकट होता है, वहीं समय से इलाज नहीं मिलने से जान पर जोखिम पढ़ने का भी खतरा है। कई मौतें भी हो चुकी हैं। ईएमओ की कमी संचालन में बाधक : मेडिकल कॉलेज में ईएमओ की कमी ट्रामा सेंटर के संचालन में मुख्य बाधा है। 

राजकीय मेडिकल कालेज में छह इमरजेंसी मेडिकल अफसर होने चाहिए, लेकिन यहां महज दो डॉ. सुजीत सिंह व डा. केपी गुप्त ही ईएमओ हैं। यह बेहोशी और अल्ट्रासाउंड की जिम्मा संभाले हैं। चार पद अब भी रिक्त हैं। मेडिकल कॉलेज में ईएमओ की तैनाती व ट्रामा सेंटर के संचालन के लिए कॉलेज प्रशासन ने पत्र भेजा, लेकिन अभी तक उसका कोई हल नहीं निकला। 

अभी हाल में जनपद के दौरे पर आए चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने यहां ट्रामा शुरू कराने की बात कही थी, लेकिन ट्रामा की योजना फाइलों से बाहर नहीं निकली। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. संदीप कौशिक का कहना है कि ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इमरजेंसी मेडिकल अफसर तैनाती होते ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा।


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