अहलादे स्थित कंपोजिट उच्च एवं प्राथमिक विद्यालय अव्यवस्था का शिकार

अहलादे स्थित कंपोजिट उच्च एवं प्राथमिक विद्यालय अव्यवस्था का शिकार

ब्लॉक एंव जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों ने इधर से मोड़ा मुंह

क्या कभी बीएसए अहलादे गांव के परिषदीय विद्यालयों की दुर्दशा देखने की जहमत उठाएंगे

रिपोर्ट :- सत्यम सिंह

अंबेडकरनगर। अकबरपुर शिक्षा क्षेत्र के कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों (परिषदीय)में घोर अव्यवस्था व्याप्त है। ग्रामीण अंचल के इन विद्यालयों में पठन पाठन का दृश्य देख कर यह नहीं कहा जायेगा कि स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। बेवाना से तीन किलोमीटर दूरस्थ गांव अहलादे में कंपोजिट उच्च प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय की हालत खस्ताहाल है। यहां की अव्यवस्था देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह कंपोजिट विद्यालय संबंधित शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी (ब्लॉक एंव जिला) अहलादे के इस संयुक्त विद्यालय की तरफ से मुंह मोड़े हुए हैं। 

क्षेत्र के जागरूक लोगों के अनुसार अहलादे गांव में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में कभी उच्च अधिकारी ने निरीक्षण किया हो ऐसा देखने सुनने में नही आया है।


सभी अध्यापक खाना पूर्ति करते हैं। वेतन के लिए ही विद्यालय में आते हैं। दोनो विद्यालयों के प्रधान अध्यापकों को घरेलू कार्य और पारिवारिक मामलो से यदि फुर्सत मिलती है तब ये दोनो लोग राजनीतिक दलों के कर्मठ कार्य कार्यों की तरह बातें करते हैं।

  1. महिला टीचर सोती हैं और अपने नन्हे बच्चों को दुलराती और उनके साथ खेलती हैं।
  2. अहलादे के इन परिषदीय विद्यालयों में मेनू के अनुसार मिड डे मील भी नहीं बनता है।
  3. स्कूल में पढ़ने वाले नन्हे बच्चों के लिए मैदान में पानी भरा है। ये बच्चे कहां खेलें।
  4. साफ सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। जब कि इस गांव में 2 सफाई कर्मी 15 सालों से नियुक्त हैं।
  5. इस कंपोजिट उच्च एंव प्राथमिक विद्यालय में निर्मित शौचालयों की हालत बदतर हो गई है।


उक्त जानकारी देने वालों ने कहा कि अकबरपुर ब्लॉक स्तर के शिक्षा अधिकारी द्वारा कभी इस विद्यालय का निरीक्षण नहीं किया जाता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने तो शायद ही इस अहलादे गांव के विद्यालयों को नक्शे मात्र में ही देखा होगा।


एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अहलादे गांव के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय की दशा देख कर कहा कि ऐसे टीचर जिन्हे देश का भविष्य बनाना चाहिए, वे अपने दायित्वहीन कृत्य से देश को डुबोने में लगे हैं। यही है देश का दुर्भाग्य। सरकारी तंत्र असफल सा दिख रहा है।

समाजसेवी ने कहा कि क्या कभी इस गांव के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की दशा देखने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा ।


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