परिवहन महकमे के एआरटीओ और पीटीओ ने दी वाहनों को छूट

परिवहन महकमे के एआरटीओ और पीटीओ ने दी वाहनों को छूट


जिले में डग्गामार व ओवरलोडेड वाहनों की संख्या में हुआ इजाफा


- सत्यम सिंह


अम्बेडकरनगर। जिले के परिवहन महकमे के मुखिया एआरटीओ और इसी विभाग के पीटीओ इस समय मीडिया की सुर्खियों में फिर आ गए हैं। दो साल पहले वर्तमान एआरटीओ वीडी मिश्र ने महकमे की कमान संभाली थी, तो लंबे-चौड़े व्यक्तव्यों से यह सिद्ध करने का प्रयास किया था कि उनका महकमा उनकी ईमानदारी, कर्त्तव्यनिष्ठा के चलते अपनी पुरानी से सर्वथा अलग हो जाएगा। वर्ष 2021 से वर्तमान तक की अवधि में एआरटीओ वीडी मिश्रा का उक्त कथन बेमानी साबित हुआ। मतलब यह कि ऐसे अधिकारी अपने बातों के भ्रमजाल में मीडिया को प्रभावित तो कर सकते हैं, परन्तु स्वंय के धनोपार्जन की गति को विराम नहीं दे सकते। 


परिणाम यह है कि इनकी धन-कमाऊ नीति से जिले में अनाधिकृत व डग्गामार वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, एआरटीओ के नक्शेकदम पर चलने वाले जिन्हें एआरटीओ का एसमैन भी कहा जाता है, नाम है प्रमोद कुमार, और ये पीटीओ पद पर तैनात हैं। अपने कृत्यों से काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं। लब्बो-लुआब यह कि परिवहन महकमा के एआरटीओ और पीटीओ दोनों मुलाजिम दोनों हाथों से धन कमाई कर अपनी जेबें भर रहे हैं। इनकी कृपा से गैराज व कबाड़ में रखे वाहन भी बगैर किसी लाइसेंस व परमिट के संचालित हो रहें हैं। इसकी एवज में ये दोनों परिवहन अधिकारी वाहन स्वामियों से अच्छी-खासी रकम सुविधा-शुल्क के रुप में वसूलते हैं।


ओवरलोड वाहन जिले में प्रत्येक वर्ष करोड़ों की लागत से बनी सड़कों को छलनी कर रहे हैं। साथ ही ऐसे वाहन हादसों का सबब बन रहे हैं, मगर इसे रोकने को लेकर फर्ज अदायगी छोड़ कोई भी विभाग गंभीर नहीं है। न तो लोक निर्माण विभाग को सही मायने में अपनी सड़कों को बचाने की चिंता है और न ही परिवहन एवं पुलिस विभाग को कार्रवाई करने की सुध। नतीजा यह है कि ओवरलोडिंग करने वाले वाहन रोज नियम कानून को ठेंगे पर रखकर सड़कों को छलनी कर रहे हैं। इसी में कभी-कभी चेकिंग के दौरान कानून व्यवस्था का भी संकट खड़ा होता रहता है।तमाम तरह की मुसीबत और चुनौती खड़ी करने वाली ओवरलोडिंग को रोकने के लिए जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक और ट्रॉले ओवरलोड होकर अलग-अलग मार्गों से गुजरते रहते हैं। यह वाहन न सिर्फ राजस्व की चोरी करते वरन शासन की ओर से अलग-अलग सड़कों पर निर्धारित की गई क्षमता की धज्जियां भी उड़ाते रहते हैं। नतीजा यह है कि प्रत्येक वर्ष जिले में करोड़ों की सड़कों को ओवरलोड वाहन छलनी कर रहे हैं। लेकिन किसी भी जिम्मेदार को इसकी सुध नहीं हैं। ऐसे में ओवरलोडिंग करने वाले ट्रांसपोर्टर और वाहन मालिक किसी भी कार्रवाई को लेकर बेखौफ रहते हैं। इन सबका खामियाजा आम जनता को बदहाल सड़कों पर चलकर भुगतना पड़ता है।


सोशल मीडिया के अनुसार, रात्रि में पीटीओ द्वारा जनपद के मुख्य मार्गों पर चलता है अवैध वसूली का खेल और शहर में ओवरलोड ट्रकों की एंट्री खुलेआम चलती है. कहते हैं कि जो गाड़ी बगैर इनके आदेश के नो एंट्री में चलती है उसे दंडित किया जाता है, उससे ही जुर्माना वसूल किया जाता है।ओवरलोड ट्रकों की एंट्री का खुलेआम खेल चल रहा है. इसके बारे में बताया जाता है कि यह खेल पी टीओ के इशारे पर चलता  है. शहर में ओवरलोड ट्रकों की एंट्री खुलेआम चलती है. जो गाड़ी इनकी एंट्री की नहीं होती उसे दंडित किया जाता है, उससे ही जुर्माना वसूल किया जाता है।नियम विरुद्ध ओवर लोडेड वाहनों के संचालन से राजस्व की हानि के साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा होता है। एआरटीओ और पीटीओ के कारनामों की जांच बहुत आवश्यक बताई जा रही है। क्या ओवरलोड वाहनों के संचालन में परिवहन विभाग के पीटीओ ही दोषी हैं या फिर जिला परिवहन महकमा के मुखिया  एआरटीओ और पीटीओ दोनों..?

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