अंबेडकरनगर में मिलावटी मिठाईयां और खाद्य पदार्थों की धड़ल्ले से बिक्री, खाद्य सुरक्षा विभाग नाकाम

अंबेडकरनगर में मिलावटी मिठाईयां और खाद्य पदार्थों की धड़ल्ले से बिक्री, खाद्य सुरक्षा विभाग नाकाम


- सत्यम सिंह, अंबेडकरनगर (उत्तर प्रदेश)  

मिलावट हो या लोग जहरीला रसायन खाएं इन पर कोई फर्क नहीं। एफएसडीए के अधिकारी अपनी कमाई में गुड़ में छींटों की तरह लिप्त बताए जाते हैं। एफएसडीए के सहायक आयुक्त और सीएफएसओ के रहते जिले के लोग अच्छी कीमत पर मिलावटी खाद्य पदार्थ खरीद कर खाते रहेंगे।  जिले का खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन पिछले चार पांच सालों से मिलावट के प्रति निष्क्रिय सा दिख रहा है। कभी कभार दिखावे के नाम पर छोटे तबके के दुकानदारों के यहां ही चेकिंग का ड्रामा करते हैं।ये अधिकारी ऐसा कर के सेल्फी खिंचवाकर मीडिया में छपवाकर अपने दायित्वों की इतिश्री करने वाले एफएसडीए के अधिकारी अपनी पीठ थपा-थपा लेते हैं।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी तो राजाओं वाले अंदाज में रहते हैं।ब्रांडेड मीडिया प्रबंधन में माहिर विभागीय अधिकारी सच्चाई छपने से तिलमिला उठते हैं, और मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। अपने खिलाफ छपी खबर को झूठी और पीत पत्रकारिता की पराकाष्ठा कहते हैं। सीएफएसओ का जलवा है।

सहायक आयुक्त 2 पिछले 5 सालों से जमे मनमानी कर रहे हैं। शहरों के नामी गिरामी दुकानों प्रतिष्ठानों पर एफएसडीए की टीम  कभी भी नहीं जाति है। यहां से मोटी रकम सुविधा शुल्क के रूप में हर महीने नीयत तिथि पर मिल जाया करती है। अकबरपुर, टांडा, बसखारी और शहजादपुर के बड़े नामी गिरामी मिठाई की दुकानों और रेस्तराओं पर एफएसडीए के अधिकारी कभी गए हों ऐसा सुनने और देखने में नही आया है।

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एफएसडीए के अधिकारियों के खाऊ कमाऊ नीति के चलते

मिलावटी मिठाइयों की भरमार

अम्बेडकरनगर। दीपावली खुशियों का त्योहार है। ऐसे में मिठाई और विशेष व्यंजन लाजिमी है। लेकिन जरा सावधान हो जाइएबाजार में मिलावटी मिठाइयों की भरमार है। थोड़ी सी लापरवाही हुई नहीं कि नकली खाद्य पदार्थ हमारे पाचन तंत्र को बिगाड़ कर रख देगा।त्योहारों के इस समय में कहीं आपका स्वाद फीका ना हो जाए ।

त्योहारों के आने से पहले ही बाजारों में मिलावटी मिठाइयों का कारोबार शुरू हो गया है। दूध के दाम बढ़ने से अब दूध से बनने वाली मिठाइयों की जगह पावडर से मिठाइयां तैयार की जा रही है। साथ ही इन्हें आकर्षित बनाने के लिए केमिकल रंगों का प्रयोग किया जा रहा है।खास बात यह है कि मिलावटी होने के कारण इनके दाम भी ज्यादा नहीं हैं। त्योहार से पहले ऐसी मिठाइयों का स्टॉक तैयार किया जाने लगा है। 

ज्ञात रहे कि दीपावली के त्योहार पर मिठाइयों की विक्री बढ़ जाती है। लोग त्यौहार के लिए बाजार से मिठाई खरीदते हैं। इसके चलते दीपावली में मिठाइयों की जमकर विक्री होती हैं। ऐसे में दूध व दूध से बने अन्य पदार्थों व लेबर के रेट बढ़ जाने के कारण इन दिनों नगर के अनेक हलवाई खुद मिठाइयों बनाने की बजाय बाहरी हलवाइयों से ठेके पर मिठाई बनवा रहे हैं। यही कारण है कि मिठाई के कारोबार में ज्यादा लाभ कमाने के लिए मिलावट चल रही है।

वहीं बेसन महंगा होने के कारण मिठाई बनाने वाले सस्ती मैदा व पीले केमिकल युक्त रंग का उपयोग कर मिठाई बना रहे हैं। लड्‌डू व पीली बरफी बनाने में यही मिलावट की जा रही है।

 एक मिठाई निर्माता ने बताया कि बेसन 70 रुपए किलो मिलता है जबकि मैदा 22 रुपए किलो। ऐसे में मैदा में पीला कैमिकल युक्त रंग मिलाकर उसकी बूूंदी से लड्‌डू तैयार किये जाते हैं। इसके दाम भी कम रखे जाते हैं जिससे ग्राहक इसे खरीदने के लिए तैयार हो जात हैं।

वहीं बताया जाता है कि अच्छी किस्म के कुकिंग ऑयल के दाम 140 रुपए किलो तक हैं। ऐसे में सस्ता ऑयल बूंदी, बरफी व सोन पपड़ी बनाने में किया जाता है। घटिया क्वालिटी की रिफाइंड का उपयोग करते समय इनमें माल की क्वालिटी बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के एसेंस की खुशबू डाली जाती है। जिससे लोगों को घटिया क्वालिटी का माल होने का एहसास न हो। 

जानकारी के अनुसार यह मिठाई ठेके पर काम करने वालों से दुकानदारों को 80 से 100 रुपये किलो तक में मिल जाती है जिसे वह 200 रुपये किलो तक ग्राहकों को देते हैं। ग्राहक भी कम दाम के चलते इनको ले जाता है।खोवा की जगह सपरेटा व पाउडर का इस्तेमाल हो रहा है इसी तरह खोवा की मिठाई भी अन्य विकल्पों से तैयार की जा रही है। जिसमें चावल का पावडर, दूध पाउडर से निर्मित खोआ, क्रीम रहित दूध से बना खोवा आदि का उपयोग मिलावट खोरो द्वारा किया जा रहा है। 

इससे तैयार मिठाई 80 रुपए किलो तक थोक में मिल जाती है। इसी मिठाई को कुछ दुकानदार अपनी दुकानों में सजाकर रखते हैं और 200 रुपए किलो तक के भाव पर बेचते हैं।तहसील टांडा बसखारी बाजार में  जैसे _जैसे दीपावली त्यौहार करीब आ रहा है मिठाईयां की दुकान सजने लगी हैं। केमिकल की मिठाइयां बाजार में धड़ल्ले से बिकने लगी हैं।

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