अंबेडकरनगर। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भौंरा में चेहल्लुम का जुलूस गमगीन माहौल में निकाला गया, जहां या हुसैन, हाय हुसैन की सदाओं के बीच मातम और सीनाजनी करते हुए अजादारों ने इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया। अंजुमन गुलशने इस्लाम भौंरा ने नोहा और मासायब पढ़कर वहां मौजूद अजादारों को रुला दिया। हर तरफ मातमी फिजा और सीनाजनी के साथ-साथ इमाम हुसैन की शहादत का गम मनाया गया।
मजलिस के दौरान मौलाना कामरान अब्बास रिजवी ने तकरीर करते हुए कर्बला की घटना पर रोशनी डाली और बताया कि किस तरह हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार पर यजीदी फौज ने अत्याचार किए। उन्होंने कहा, "कर्बला की शहादत इंसानियत और हक की बुलंदी का पैगाम देती है। इमाम हुसैन ने अत्याचार के खिलाफ खड़े होकर सब्र का जो मोल दिया, वह दुनिया के सामने मिसाल बन गया है। यजीद, जिसने जुल्म की सारी हदें पार कर दी थीं, उसका नाम इतिहास के पन्नों से मिट गया, लेकिन इमाम हुसैन का नाम आज भी इंसानियत और सत्य के प्रतीक के रूप में अमर है।"
मौलाना ने बताया कि यजीद की ज़ुल्मों सितम और उसके अत्याचार की याद आज भी दुनिया में हर उस शख्स के लिए एक सबक है जो इंसानियत के खिलाफ खड़ा होता है। उन्होंने कहा, "इमाम हुसैन का नाम जब तक दुनिया रहेगी, सही दे आजम के रूप में याद किया जाएगा, जबकि यजीद पर कयामत तक लानत भेजी जाती रहेगी।"
इस अवसर पर अंजुमन गुलशने इस्लाम के सदस्यों ने शोक प्रकट करते हुए नोहा और मासायब पढ़े, जिससे वहां मौजूद सैकड़ों की संख्या में अजादारों की आंखें नम हो गईं। पूरे क्षेत्र में चेहल्लुम के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, ताकि शांति और सौहार्द्र बना रहे।
