अम्बेडकरनगर। कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में अग्निकांडों के जख्म बहुत गहरे हैं। इसकी पीड़ा लोगों में अभी भी बनी हुई है। कारण, प्रतिवर्ष चिगारी कई घरों तथा लाखों की संपत्ति को जलाकर राख कर देती है। इसमें जन-धन की हानि किसी से छिपी नहीं है, लेकिन इस आपदा पर त्वरित अंकुश लगाने के लिए भीटी में प्रस्तावित अग्निशमन केंद्र का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। महज कागजों में इसकी कवायद चल रही है। इसके बावजूद यह ज्वलंत समस्या अभी तक चुनावी मुद्दा नहीं बन सका है।
भीटी तहसील कटेहरी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस तहसील को भीटी विकासखंड की 92 तथा कटेहरी की 35 ग्राम पंचायतों के 257 गांवों को मिलाकर बनाया गया है। तहसील के विभिन्न गांवों में प्रतिवर्ष अग्निकांड की दर्जनों घटनाएं होती हैं। विगत वर्षों पीठापुर गांव में 40, बिशनपुर गांव में 26 घर एक चिगारी से देखते ही देखते स्वाहा हो गए। इन घटनाओं में कई मवेशियों की मौत तथा लाखों की संपत्ति जलकर राख हो गई। वर्ष 1998 में हीड़ी पकड़िया में तीन जाने जिदा जल गईं थीं। ये घटनाएं महज बानगी भर हैं। ऐसे तमाम हादसे सरकारी अभिलेखों में दर्ज हैं। फायर स्टेशन के लिए प्रस्तावित स्थल से गुजरे भीटी-गोसाईगंज मार्ग के पश्चिम दिशा में फैजाबाद व भीटी के दक्षिण दिशा में सुलतानपुर जिले के सैकड़ों गांव स्थित हैं। इन गांवों में भी प्रतिवर्ष अग्निकांड की घटनाओं से भारी धन-जन की हानि होती है। यहां अग्निशमन केंद्र की स्थापना होने से एक साथ तीन जनपदों के अग्निकांडों पर त्वरित अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
वर्ष 2013 में तत्कालीन सपा सरकार द्वारा भीटी में अग्निशमन केंद्र प्रस्तावित किया गया और शासन से इसे मंजूरी भी मिल गई। तत्समय विभाग ने चतुरीपट्टी गांव के पास भूमि अधिग्रहीत कर बोर्ड लगा दिया। इससे अयोध्या तथा अंबेडकरनगर और सुलतानपुर जिले के सैकड़ों गांव के लोगों में अग्निकांड पर अंकुश लगाने की आस जगी थी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तत्समय पूरे प्रदेश में अग्निशमन केंद्रों की स्थापना के लिए करोड़ों रुपये निर्गत किए गए थे, लेकिन राजनीतिक खींचतान के चलते यह योजना कहीं अन्यत्र चली गई।
अग्निकांड की घटनाओं को देखते हुए भीटी के नाम से प्रस्तावित स्थल पर बोर्ड के अलावा अग्निशमन की एक गाड़ी भीटी थाने में खड़ी कर दी गई, लेकिन एक साथ कई घटनाएं होने से एक गाड़ी आग बुझाने में असफल रहती है। यदि अग्निशमन केंद्र को वजूद में नहीं लाया गया तो प्रतिवर्ष लाखों की संपत्ति को स्वाहा होने से नहीं रोका जा सकता और लोग इस समस्या में प्रतिवर्ष जलते रहेंगे।
भीटी तहसील में प्रस्तावित यह अग्निशमन केंद्र सुलतानपुर तथा अयोध्या जिले की सीमा पर है। यहां स्थापित होने से तीन जिलों के अग्निकांडों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। उक्त जनपदों की सदर के अलावा बीकापुर, जयसिंहपुर तहसील के गांव भीटी से सटे हैं। इसी को देखते हुए मध्य क्षेत्र में स्थित भीटी को अग्निशमन केंद्र स्थापना का केंद्र बिदु बनाया गया है। आग की बड़ी घटनाओं के दौरान उक्त जिलों के अग्निशमन की गाड़ियों को बुलाना पड़ता है, लेकिन जब तक गाड़ियां पहुंचती हैं तब तक सब कुछ जलकर राख हो जाता है। अन्य हादसों से तो कुछ बच भी जाता है, लेकिन अग्निकांड में कुछ नहीं बचता। संपत्तियां बचाने में लोग अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। हादसे के बाद जिम्मेदार लोग घड़ियाली आंसू बहाने पहुंच जाते हैं, लेकिन इसकी पुनरावृति रोकने की दिशा में कोई पहल नहीं की जाती। ऐसे में अग्निकांड रोकने की दिशा में प्रभावी पहल सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अग्निकांड से संपत्ति का नुकसान तो होता ही है, साथ ही किसी की बिटिया की शादी तक टूट जाती है। शादी समारोह में अग्निकांड होने की दशा में सारी खुशियां पल भर में काफूर हो जाती हैं। अग्निशमन केंद्र की स्थापना होने से ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद अवश्य मिलेगी।