समाजसेवियों ने प्रदेश के सीएम और डिप्टी सीएम से की जोरदार मांग
22 साल से जिले में जमे इस सहायक ने कमाई है अकूत सम्पत्ति, मीडियों की सुर्खियों में रहा अव्वल
अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर में कार्यरत सरकारी विभागीय कार्यालयों में वर्षों से तैनात मनमाने तरीके से काम करने वाले सहायकों की कमी नहीं है। आये दिन मीडिया/सोशल/इण्टरनेट मीडिया में इन सबके कारनामों का विधिवत जिक्र पढ़ने व सुनने को मिलता है। सरकारी महकमों में एक ऐसा महकमा है जिसमें लगभग 22 सालों से जमे अकूत कमाई करने वाले एक सहायक का नाम सबसे ऊपर है।
इस सहायक के बारे में सोशल मीडिया/वेब मीडिया में विस्तृत खबरें छपती रहती हैं। कई समाजसेवियों ने व्यक्तिगत रूप से जिले के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देकर इसके स्थानान्तरण की मांग तो की ही है साथ ही लोगों ने प्रदेश शासन में मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री से शिकायत किया है। इन सबके बावजूद नतीजा सिफर ही है। उक्त सहायक अब भी अपने विभाग के पद और कुर्सी पर दृढ़ता से बैठकर दर्जनों महत्वपूर्ण पटलों का प्रभार लिये अवैध कमाई कर रहा है।
अम्बेडकरनगर जिले के सी.एम.ओ. कार्यालय में तैनात चर्चित सहायक के बारे में चर्चा है कि इसका सम्बन्ध उत्तर प्रदेश की राजधानी में रह रहे एक ऐसे मीडिया परसन से है जिसका सीधा सम्बन्ध मुख्यमंत्री से है। उक्त मीडिया कर्मी की सह पर यह बाबू निर्भय होकर मनमाना कर रहा है। इसे मीडिया में प्रकाशित/प्रसारित खबरें प्रभावित नहीं कर पा रही हैं। सीएमओ कार्यालय के सहायक के बारे में बताया गया है कि वर्ष 2021 के जुलाई महीने में हुए व्यापक तबादले की जद में यह भी आ गया था, परन्तु अपने तिकड़म और पहुँच के बल पर इसने शासन और विभाग के उच्चाधिकारियों को गुमराह कर अपना तबादला रोकवा लिया था।
जिले के समाजसेवी नील रत्न मणि ने प्रदेश सी.एम., डिप्टी सीएम तथा जिले के उच्चाधिकारियों को प्रेषित शिकायती-पत्र में लिखा है कि इस सहायक के पास अकूत सम्पत्ति है। जो इसके महान भ्रष्टाचारी होने का प्रमाण है। अकबरपुर शहजादपुर के अलावा इस सहायक ने प्रदेश के कई बड़े शहरों में कीमती भूखण्ड, मिल-फैक्ट्रियां अपने तमाम रिश्तेदारों के नाम ले रखा है। आलीशान आवासीय भवन, बड़े एवं भव्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान, बेश कीमती भूखण्डों का स्वामी यह सहायक जो एक सरकारी कर्मचारी है। समस्त सुख-सुविधा सम्पन्न है। मृतक आश्रित कोटे से यह 22 वर्ष पूर्व कनिष्ठ सहायक के रूप में स्वास्थ्य विभाग में आया और तभी से यह सीएमओ की गुडबुक में अंकित हो गया। सेवा के शुरूआती दिनों से लेकर अब तक इसका प्रभुत्त पूरे स्वास्थ्य महकमे पर बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य महकमे में कई दर्जन चार पहिया वाहन सम्बद्ध किये गये हैं जो इसके और इसके चहेतों के हैं। स्वास्थ्य महकमे में पीएचसी, सीएचसी और अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में आवश्यक उपकरण, दवाएँ, कुर्सी-मेज, बिस्तर, चद्दर आदि आपूर्ति किये जाने का जिम्मा भी इसी को मिला हुआ बताया गया है। इसके पास दर्जनों महत्वपूर्ण पटल है। विभाग के अन्य सहायक व कर्मचारी इसकी कारगुजारी से परेशान हैं। उनका कहना है कि जब सारे पटल एक के पास हैं तो उन लोगों का वहाँ रहने का क्या औचित्य?
बताया गया कि 2020 कोरोना काल में इस सहायक के कारखाने में निर्मित मास्क, बेडशीट और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सामग्रियों की आपूर्ति जारी हुई जो अब तक चल रही है। सूत्रों के अनुसार इस धनाढ्य सहायक के कारखाने, फैक्ट्री के इर्द-गिर्द दर्जनों लक्जरी गाड़ियों का जमावड़ा हर शाम देखा जा सकता है। इस बावत बताया गया है कि इनमें बैठकर इसके घनिष्ठ मित्र, प्रभावशाली ठेकेदार एवं अन्य मालदार असामी वहां आते हैं। जहाँ महंगी शराब और लजीज व्यंजन का लुत्फ उठाते हैं। यह सिलसिला शाम से शुरू होकर देर रात तक चलता है। इस पर आने वाला खर्चा यह सहायक स्वयं उठाता है।
इस धनकुबेर और विभागीय वटवृक्ष कहे जाने वाले बाबू के बारे में बताया गया है कि खाने-पीने पहनने, ओढ़ने आदि में हजारों रूपए प्रतिदिन खर्च करने वाला यह सहायक महीने में ढाई से तीन लाख रूपए लोगों को खुश करने में खर्च करता है।
जिले के कई समाजसेवियों द्वारा सीएमओ कार्यालय के इस सहायक के कारनामों और अकूत कमाई के बारे में यूपी की योगी सरकार-2 में डिप्टी सी.एम. डॉ. बृजेश कुमार पाठक को लिखित रूप से प्रेषित शिकायती-पत्र में औचक निरीक्षण करने तथा जाँचोपरान्त कड़ी एवं उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है। इन समाजसेवियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी उक्त सहायक के बारे में शिकायती पत्र प्र्रेषित कर कार्रवाई की मांग की है। समाजसेवियों द्वारा इस सहायक के तबादले की भी जोरदार मांग की गई है।
