अम्बेडकरनगर : मिझौ़ड़ा चीनी मिल और माफिया गठजोड़ में पिस रहे गन्ना किसान

अम्बेडकरनगर : मिझौ़ड़ा चीनी मिल और माफिया गठजोड़ में पिस रहे गन्ना किसान


अम्बेडकरनगर। गन्ना माफिया को न तो शासन का डर है और न ही प्रशासन का। चीनी मिल और माफिया के गठजोड़ में जनपद के गन्ना किसान पिस रहे हैं। पर्ची के अभाव में भटकते किसानों का फायदा गन्ना माफिया उठा रहे हैं। किसानों से औने-पौने दाम पर गन्ना खरीद कर चीनी मिल को बेच माफिया मालामाल हो रहे हैं। माफिया की दखलंदाजी से गन्ना विकास कमीशन, गन्ना क्रय कर आदि वसूल न होने से राजस्व को चोट पहुंचाने के बाद भी विभाग आंख मूंदे पड़ा है। 


मिल गेट पर तौल कांटों पर आने वाले गन्ने को गन्ना माफिया औने पौने दामों पर खरीदकर चीनी मिल में ही बेचने का काम कर रहे हैं। यही नहीं मिल के सेंटरों से आने वाले ट्रकों का भी गन्ना चोरी छिपे खरीदकर तौल बाबुओं को अपने साथ मिलाकर मोटी रकम कमाने में माफिया जुटे हुए हैं। इसके अलावा बुनियादी जरूरत पूरी करने के लिए भी किसानों के पास नकद पैसा लेने की जल्दी रहती है, जिससे ये माफिया बखूबी फायदा उठाते हैं।समिति अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इस धंधे में शामिल रहते हैं, क्योंकि उन्हीं के संरक्षण में यह धंधा चल रहा है।


 यदि फर्जी रकबे की पर्ची न मिले तो माफिया का गन्ना सूखने लगता है, तीन दिन गन्ना न उठने पर उन्हें पसीना आना शुरू हो जाता है। गन्ना समिति अधिकारी किसानों के रकबे में खेल कर उन्हें पर्ची देते हैं। ताकि उनका गन्ना समय से संबंधित मिल में पहुंचता रहे। जबकि यह पूरी तरह से अपराध है। समिति कर्मचारी ऐसा कर किसानों के हक पर डाका डालने का काम कर रहे हैं। 


विश्व सूत्रों से पता चला है कि गन्ना माफिया अकबरपुर चीनी मिल के अंदर अपने गुर्गों के सहारे किसानों से ओने पौने दामों में गन्ना की खरीद कर लेते हैं तथा दूरदराज से आए हुए किसानों पर अपना धौस भी जमाते हैं। सूत्रों ने यह भी बताया है कि इन गन्ना माफियाओं की ट्रालियां जहां पर किसान अपने तौल से ज्यादा हुए गन्ना उतारते हैं वहीं पर लोड हो जाती है और अधिकारियों की मिलीभगत से सीधे कांटे पर एक घंटे के अंदर ही तौल करा दी जाती है।


गन्ना माफिया चीनी मिल के कर्मचारी के साठगांठ से  इनकी ट्रालियां मेन गेट से ना होते हुए डायरेक्ट कांटे पर पहुंचते हैं। आपको बता दे गन्ना माफिया अपने सेटिंग के चलते ब्राइटी बाबू को अपने कब्जे में लेते हुए बिना ट्राली के ही वहां ब्राइटी लगवा लेते हैं। इसके बाद टोकन नंबर भी अपने दबंगई के चलते जारी करवा लेते हैं बाद में आधे घंटे के अंदर ही इनकी ट्रालियां कांटे से होते हुए गन्ने की आपूर्ति कर देते हैं। वही दूरदराज से आए किसान को करीब 4 से 5 घंटे का समय अपूर्ति करने में लगता है। गन्ना माफिया कांटे के इर्द-गिर्द देखे जा सकते हैं।

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