अंबेडकरनगर: जिले के मनरेगा कर्मियों की दीपावली इस बार आर्थिक संकट के बीच फीकी पड़ती नजर आ रही है। शासन से बजट की कमी के कारण तीन माह का बकाया मानदेय अभी तक न मिलने से कर्मियों में नाराजगी गहराती जा रही है। खासकर त्योहार के मौके पर मानदेय न मिलने से उनके परिवारों में मायूसी छा गई है।
प्रदेश सरकार ने सभी राज्य कर्मियों को दीपावली से पूर्व वेतन और पेंशन का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे त्योहार का आनंद ले सकें। अधिकतर विभागों ने अपने वेतन बिल कोषागार को भेज दिए हैं और उनका भुगतान भी शीघ्र होने की उम्मीद है। लेकिन जिले में कार्यरत 584 मनरेगा कर्मियों में से कुछ ही कर्मियों को अक्टूबर तक का मानदेय मिला है। शेष कर्मियों को केवल जुलाई तक का मानदेय दिया गया है, जबकि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का मानदेय अभी तक लंबित है।
मनरेगा के तहत कार्यरत कर्मियों में आठ अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, सात लेखा सहायक, आठ कंप्यूटर ऑपरेटर और 561 रोजगार सेवक शामिल हैं। ये कर्मी हर माह समय पर मानदेय मिलने की उम्मीद रखते हैं, ताकि वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें। उन्होंने बताया कि आर्थिक संकट के कारण त्योहार पर खुशियां अधूरी रह गई हैं। दशहरे पर भी मानदेय मिलने की आस थी, लेकिन शासन से कोई राहत नहीं मिली।
मनरेगा कर्मियों की लंबे समय से मांग है कि उन्हें समय पर मानदेय मिले और उनकी सुरक्षा के लिए मानव संसाधन नीति लागू की जाए। वे मानदेय वृद्धि की भी मांग करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री द्वारा मानव संसाधन नीति लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई अमल नहीं हो पाया है।
इस संदर्भ में उपायुक्त श्रम रोजगार विजय अस्थाना ने बताया, “मनरेगा के केवल तकनीकी सहायकों का मानदेय अक्टूबर तक प्राप्त हुआ है, जबकि अन्य कर्मियों का तीन माह का मानदेय बकाया है। शासन से दीपावली से पहले मानदेय का भुगतान करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। बजट मिलते ही सभी कर्मियों का भुगतान कर दिया जाएगा।”
