अंबेडकरनगर । इस जिले में नियुक्त सरकारी अधिकारियों का रवैया एक दम से फिरंगियों जैसा। जिले के लोगों को आपस में लड़ा कर अपना उल्लू सीधा करने वालों से प्रबुद्ध वर्गीय लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
निर्माण, सड़क निर्माण से सरोकार रखने वाला एक महकमा और इसके अभियंताओ नेआज कल अपनी कारगुजारियां छिपाने का नया अंग्रेज तरीका अपना लिया है। निर्माण कार्यों के लिए सरकारी धन की आपसी बांट करने में आने वाले व्यवधानों से बड़ी ही अक्लमंदी से निजात पाने का प्रयास कर रहे हैं।
मीडिया का सहारा बड़े ही चालाकी से लेने वाले ये अभियंता गण मीडिया और स्थानीय प्रभावशाली लोगों को आपस में भिड़ा रहे है।
पैसा कमाने की हवस रखने वालों ने अपने रास्तों के कांटों को अजीब तरीके से निकलना शुरू किया है।
लोक निर्माण विभाग के कई सहायक अभियंता,जेई और एक अति महत्वपूर्ण बड़े पद पर आसीन अभियंता ने अपने बचाव के लिए अंग्रेजों की तरह डिवाइड एन रूल का फार्मूला निकाला है।
एक बड़े अभियंता के बारे में बताया जाता है कि इसने इस जिले के स्वजातीय प्रभावशाली, ठेकेदारों , मीडिया पर्सन्स को पटा रखा है।
मीडिया प्रबंधन में माहिर इस अभियंता के खासम खास इस बात का ढिढोरा पीटते हैं कि यह अपनी पहुंच सीधे सीएम से रखता है। 2 करोड़ खर्च करके पीडब्ल्यूडी के अहम पद पर जिले में अपना ट्रांसफर करवाया है। सीएम का स्वजातीय है, इस बात का ज्यादा हल्ला है।
इस बड़े अभियंता के प्रचारक स्वजातीय लोग हैं, जो इसके तारीफों के पुल हमेशा बांधा करते हैं। एक तरह से पीडब्ल्यूडी महकमे में जातिवाद का बोल बाला बढ़ा हुआ बताया गया है।
इस बड़े अभियंता के प्रचारक जो इसके स्वजातीय हैं, कहते हैं कि बड़े साहेब इस जिले के विभागीय बड़े ओहदे पर निर्भय होकर कार्य कर रहे हैं। रोब दाब किसी फिरंगी शासन काल के कलेक्टर से कम नहीं।लाखों की कमाई इनके लिए कोई मायने नहीं रखती है,ये तो पूरे का पूरा धन ही पचाने का माद्दा रखते हैं।
पीडब्ल्यूडी के महत्वपूर्ण खंडों के कई ए ई, जेई का जलवा भी चर्चा में है।
इस समय जिले के पीडब्ल्यूडी विभाग में देवरिया,गोरखपुर, काशी बनारस और इलाहाबाद के निवासियों का बोलबाला है।
ये लोग जेई ,एई और एक्स ईएन पद पर विराजमान होकर जिले में निर्माण कार्यों के लिए आए सरकारी धन का सदुपयोग स्वयं के लिए कर रहे हैं।
एक एक करके सभी के बारे में .....
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